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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 14
श्रेयसी बुद्धिरावृत्तेस्ततो ध्यानं परं मतम् । ततोऽखिलपरित्यागस्ततः शान्तिर्गरीयसी ॥
प्रथम मुझमें बुद्धि लगना श्रेष्ठ है, उससे ध्यान श्रेष्ठ है, उससे सम्पूर्ण कर्मों का त्याग श्रेष्ठ है, इससे अत्यन्त श्रेष्ठ शान्ति है।
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