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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 12
तत्रापि त्वमशक्तश्चेत्कुरु कर्म मदर्पणम् । मामनुग्रहतश्चैवं परां निर्वृतिमेष्यसि ॥
और जो यह भी न हो सके तो जो कुछ कर्म करो, उसे मुझे अर्पित करो, मेरी कृपा से तुम परम शान्ति को प्राप्त होओगे।
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