असमर्थोऽर्पितुं स्वान्तं एवं मयि नराधिप ।
अभ्यासेन चे योगेन ततो गन्तुं यतस्व माम् ॥
हे राजन्! यदि मुझमें अपना मन न लगा सको तो अभ्यासयोग से मुझे प्राप्त होने का यत्न करो।
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