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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 1
वरेण्य उवाच- अनन्यभावस्त्वां सम्यङ्मूर्तिमन्तमुपासते । योऽक्षरं परमव्यक्तं तयोः कस्ते मतोऽधिकः ॥
वरेण्य बोले - (हे भगवन्!) मूर्तिमान् आपकी जो अनन्यभाव से उपासना करते हैं और जो अक्षर एवं परम अव्यक्त आपकी उपासना करते हैं, उनमें श्रेष्ठ कौन है?
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