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गणेशगीता • अध्याय 8 • श्लोक 1
वरेण्य उवाच- भगवन्नारदो मह्यं तव नाना विभूतयः । उक्तवांस्ता अहं वेद न सर्वाः सोऽपि वेत्ति ताः ॥
वरेण्य बोले - हे भगवन्! नारदजी के मुख से मैंने आपकी अनेक विभूतियोंका श्रवण किया है, उन्हें मैं जानता हूँ, सब नहीं जानते; क्योंकि सम्पूर्ण विभूति तो नारदजी भी नहीं जानते।
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