भक्तिपूर्वक एकचित्त से जो मेरी पूजा करता है, मैं उसके मनोरथ को पूर्ण करता हूँ। इस प्रकार प्रतिदिन भक्तिपूर्वक मेरे भक्त को मेरी पूजा करनी चाहिये।
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