अनेकजन्मसंभूतिः संसृतिः परिकीर्तिता ।
संसृतिं प्राप्नुवन्त्येते ये तु मां गणयन्ति न ॥
अनेक जन्मों की सम्भूति (आवागमन) को संसृति कहते हैं, इस संसृति को वे प्राप्त होते हैं, जो मुझे नहीं मानते।
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