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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 4
क्षरं पञ्चात्मकं विद्धि तदन्तरक्षरं स्मृतम् । उभाभ्यां यदतिक्रान्तं शुद्धं विद्धि सनातनम् ॥
पंचमहाभूतों को क्षर कहते हैं, उसके अनन्तर अक्षर है, इन दोनों का अतिक्रमण कर शुद्ध सनातन ब्रह्म को जानो।
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