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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 22
यद्यत्करोति तत्सर्वं स मे मयि निवेदयेत् । योषितोऽथ दुराचाराः पापास्त्रैवर्णिकास्तथा ॥
यह जो कुछ भी करे, सब मुझे निवेदन कर दे। मेरा आश्रय करने वाले स्त्री, दुराचारी, पापी, क्षत्रिय वैश्य-शूद्रादि भी
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