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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 20
ॐकारः पावनः साक्षी प्रभुर्मित्रं गतिर्लयः । उत्पत्तिः पोषको बीजं शरणं वास एव च ॥
ओंकार, पावन, साक्षी, प्रभु, मित्र, गति, लय, उत्पत्ति, पोषक, बीज, शरण, इसी प्रकार
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