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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 2
श्रीगजानन उवाच- अग्निर्ज्योतिरहः शुक्ला कर्मार्हमयनं गतिः । चान्द्रं ज्योतिस्तथा धूमो रात्रिश्च दक्षिणायनम् ॥२
श्रीगणेशजी बोले - अग्नि, ज्योति और दिवास्वरूपा शुक्लागति होती है, जो उत्तरायण है, चन्द्र, ज्योति, धूम और रात्रिस्वरूपा कृष्णागति दक्षिणायन कही गयी है।
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