श्रीगणेशजी बोले - अग्नि, ज्योति और दिवास्वरूपा शुक्लागति होती है, जो उत्तरायण है, चन्द्र, ज्योति, धूम और रात्रिस्वरूपा कृष्णागति दक्षिणायन कही गयी है।
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