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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 19
ध्यानं ध्येयं स्तुतिं स्तोत्रं नतिर्भक्तिरुपासना । त्रयीज्ञेयं पवित्रं च पितामहपितामहः ॥
ध्यान, ध्येय, स्तुति, स्तोत्र, नमस्कार, भक्ति, उपासना, वेदत्रयी से जानने योग्य, पवित्र, पितामह का पितामह - सब मैं ही हूँ।
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