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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 17
जपं निवेद्य देवाय स्तुत्वा स्तोत्रैरनेकधा । एवं मां य उपासीत स लभेन्मोक्षमव्ययम् ॥
फिर देवता के निमित्त जप को निवेदन कर अनेक प्रकार से स्तोत्रका पाठ करे, इस प्रकार से जो मेरी उपासना करता है, वह सनातनी मुक्ति को प्राप्त होता है।
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