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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 16
न्यासं च मूलमन्त्रस्य ततो ध्यात्वा जपेन्मनुम् । स्थिरचित्तो जपेन्मन्त्रं यथा गुरुमुखागतम् ॥
इसके उपरान्त मूलमन्त्र का न्यास करके ध्यान करे और स्थिरचित्त से गुरुमुख से सुने हुए मन्त्र का जप करे।
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