याति कल्पसहस्रं स निरयान्दुःखभाक् सदा ।
भूतशुद्धिं विधायादौ प्राणानां स्थापनं ततः ॥
वह सहस्र कल्पवर्ष तक नरक में पड़कर सदा दुःख भोगता है। प्रथम भूतशुद्धि करके फिर प्राणायाम करे।
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