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गणेशगीता • अध्याय 7 • श्लोक 1
वरेण्य उवाच- का शुक्ला गतिरुद्दिष्टा का च कृष्णा गजानन । किं ब्रह्म संसृतिः का मे वक्तुमर्हस्यनुग्रहात् ॥
वरेण्य बोले - हे गजानन! शुक्लागति और कृष्णागति किसको कहते हैं, ब्रह्म क्या है और संसृति क्या है, यह सब आप मुझसे कृपाकर कहिये।
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