वरेण्य उवाच-
का शुक्ला गतिरुद्दिष्टा का च कृष्णा गजानन ।
किं ब्रह्म संसृतिः का मे वक्तुमर्हस्यनुग्रहात् ॥
वरेण्य बोले - हे गजानन! शुक्लागति और कृष्णागति किसको कहते हैं, ब्रह्म क्या है और संसृति क्या है, यह सब आप मुझसे कृपाकर कहिये।
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