साक्षात्करोति मां कश्चिद्यत्नवत्स्वपि तेषु च ।
मत्तोऽन्यन्नेक्षते किंचिन्मयि सर्वं च वीक्षते ॥
उन यत्नवानों में कोई एक मेरा साक्षात् करता है, मुझसे अन्य और किसी को नहीं देखता और मुझ में सम्पूर्ण जगत् को देखता है।
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