तत्त्वमेतन्निबोद्धुं मे यतते कश्चिदेव हि ।
वर्णाश्रमवतां पुंसां पुरा चीर्णेन कर्मणा ॥
मेरे इस तत्त्व को जानने के निमित्त वर्णाश्रमी पुरुषों में पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार कोई एक यत्न करता है।
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