प्रथम तो मेरी प्रकृति को जानना चाहिये, उससे ज्ञान प्राप्त होता है, इसके उपरान्त मेरा ज्ञान होने से प्राणियों को विज्ञान-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
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