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गणेशगीता • अध्याय 6 • श्लोक 3
ज्ञेया मत्प्रकृतिः पूर्वं ततः स्यां ज्ञानगोचरः । ततो विज्ञानसम्पत्तिर्मयि ज्ञाते नृणां भवेत् ॥
प्रथम तो मेरी प्रकृति को जानना चाहिये, उससे ज्ञान प्राप्त होता है, इसके उपरान्त मेरा ज्ञान होने से प्राणियों को विज्ञान-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
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