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गणेशगीता • अध्याय 6 • श्लोक 21
द्विविधा गतिरुद्दिष्टा शुक्ला कृष्णा नृणां नृप । एकया परमं ब्रह्म परया याति संसृतिम् ॥ इति श्रीगणेशपुराणे गजाननवरेण्यसंवादे गणेशगीतायां बुद्धियोगो नाम षष्ठोऽध्यायः ॥
हे राजन्! मनुष्यों की कृष्ण और शुक्लपक्ष के भेद से अनेक गतियाँ हैं, एक से प्राणी संसार में आता है और दूसरी से परब्रह्म को प्राप्त होता है।
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