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गणेशगीता • अध्याय 6 • श्लोक 17
यं यं देवं स्मरन्भक्त्या त्यजति स्वं कलेवरम् । तत्तत्सालोक्यमायाति तत्तद्भक्त्या नराधिप ॥
भक्तिपूर्वक जिस-जिस देवता को स्मरण करता हुआ प्राणी अपने कलेवर का त्याग करता है, हे राजन्! उनकी भक्ति करने से उन्हीं के लोक को प्राप्त होता है।
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