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गणेशगीता • अध्याय 6 • श्लोक 15
अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं न विदुः काममोहिताः । नाहं प्रकाशतां यामि अज्ञानां पापकर्मणाम् ॥
मुझ अव्यक्त के व्यक्त स्वरूप को काम से मोहित दृष्टि वाले नहीं जानते, अज्ञानी और पापी पुरुषों के लिये मैं प्रकट नहीं होता हूँ।
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