तथा तथास्य तं भावं पूरयाम्यहमेव तम् ।
अहं सर्वं विजानामि मां न कश्चिद्विबुध्यते ॥
उसी प्रकार से मैं उनके भाव को पूर्ण करता हूँ। मैं सबको जानता हूँ, किंतु मुझे कोई पूरी तरह नहीं जानता।
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