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गणेशगीता • अध्याय 6 • श्लोक 13
अन्ये नानाविधान्देवान्भजन्ते तान्व्रजन्ति ते । यथा यथा मतिं कृत्वा भजते मां जनोऽखिलः ॥
जो अनेक प्रकार के देवताओं का भजन करते हैं, वे उन्हीं को प्राप्त होते हैं। सम्पूर्ण मनुष्य जैसी जैसी मति करके मेरा भजन करते हैं,
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