न मां विन्दति पापीयान्मायामोहितचेतनः ।
त्रिविकारा मोहयति प्रकृतिर्मे जगत्त्रयम् ॥
माया से मोहित चित्त वाले पापी मुझे नहीं जानते, तीन प्रकार के विकार (सत्, रज, तम) वाली मेरी प्रकृति त्रिलोकी को मोहित करती रहती है।
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