श्रीगणेशजी बोले - (हे राजन्!) इस प्रकार मुझमें मन लगाकर मेरा वह तत्त्व जानो, जिसके जानने से मुझे सर्वगत और यथार्थ जानकर मुक्त हो जाओगे।
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