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गणेशगीता • अध्याय 5 • श्लोक 9
चैत्ये सवल्मिके देशे पिशाचादिसमावृते । नाभ्यसेद्योगविद्योगं योगध्यानपरायणः ॥
चैत्य वृक्ष के नीचे, वल्मीक (बाँबी) वाले स्थान में और पिशाचादि से युक्त स्थान में योगध्यानपरायण योगी योगाभ्यास न करे।
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