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गणेशगीता • अध्याय 5 • श्लोक 8
सध्वनावतिजीर्णे गोःस्थाने साग्नौ जलान्तिके । कूपकूले श्मशाने च नद्यां भित्तौ च मर्मरे ॥
जिस स्थान में ध्वनि अधिक हो, जो टूटा-फूटा हो, गोष्ठ, अग्नि के निकट, जल के निकट, कूप के निकट, श्मशान, नदी, दीवार के निकट तथा जहाँ शुष्क पर्ण का शब्द सुनायी पड़ता हो,
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