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गणेशगीता • अध्याय 5 • श्लोक 7
तप्तः श्रान्तो व्याकुलो वा क्षुधितो व्यग्रचित्तकः । कालेऽतिशीतेऽत्युष्णे वानिलाग्न्यम्बुसमाकुले ॥
जो संतप्त हो, श्रान्त हो, व्याकुल, क्षुधित अथवा व्यग्रचित्त हो, वह योगाभ्यास न करे। अतिशीतकाल अथवा अति उष्णकाल, अग्नि, वायु और जल की अधिकता वाले देश में,
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