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गणेशगीता • अध्याय 5 • श्लोक 25
श्रीगजानन उवाच- दिव्यदेहधरो योगाद्भ्रष्टः स्वर्भोगमुत्तमम् । भुक्त्वा योगिकुले जन्म लभेच्छुद्धिमतां कुले ॥
श्रीगणेशजी बोले - (हे राजन्!) योगभ्रष्ट पुरुष दिव्य देह धारण कर स्वर्ग में जाते हैं, वहाँ उत्तम सुख भोगकर पुनः शुद्ध योगियों के कुल में जन्म लेते हैं।
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