अतिदुःखं च वैराग्यं भोगाद्वैतृष्ण्यमेव च ।
गुरुप्रसादः सत्सङ्ग उपायास्तज्जये अमी ॥
अतिशय दुःख, वैराग्य, भोग में तृष्णा का त्याग, गुरु की कृपा, सत्संग - ये इस (मन) के जीतने के उपाय हैं।
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