विषयरूपी अरोंसे यह दृढ़ चक्र बना हुआ है और कर्मरूपी कीलों से अच्छी प्रकार जड़ा हुआ है, इस कारण साधारण मनुष्य इसके छेदन करने में समर्थ नहीं होते।
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