मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
गणेशगीता • अध्याय 5 • श्लोक 20
श्रीगजानन उवाच- यो निग्रहं दुर्ग्रहस्य मनसः सम्प्रकल्पयेत् । घटीयन्त्रसमादस्मान्मुक्तः संसृतिचक्रकात् ॥
श्रीगणेशजी बोले - (हे राजन्!) जो निग्रह करने में कठिन इस मन का नियमन करता है, वह घटीयन्त्र के समान घूमने वाले इस संसारचक्र से मुक्त हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें