योगेन यो मामुपैति तमुपैम्यहमादरात् ।
मोचयामि न मुञ्चामि तमहं मां स न त्यजेत् ॥
योग से जो मुझको प्राप्त होता है, उसको मैं आदरपूर्वक प्राप्त होता हूँ और जो मुझे नहीं छोड़ता है, उसको मैं नहीं छोड़ता हूँ तथा संसार से मुक्त कर देता हूँ।
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