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गणेशगीता • अध्याय 5 • श्लोक 12
नातिभुञ्जन्सदा योगी नाभुञ्जन्नातिनिद्रितः । नातिजाग्रत्सिद्धिमेति भूप योगं सदाभ्यसन् ॥
हे राजन्! योगी सदा थोड़ा भोजन करे, बिना भोजन किये भी न रहे, न बहुत सोये, न बहुत जागे - इस प्रकार सदा योगाभ्यास करने से सिद्धि को प्राप्त हो जाता है।
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