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गणेशगीता • अध्याय 5 • श्लोक 1
श्रीगजानन उवाच- श्रौतस्मार्तानि कर्माणि फलं नेच्छन्समाचरेत् । शस्तः स योगी राजेन्द्र अक्रियाद्योगमाश्रितात् ॥
श्रीगणेशजी बोले - हे राजन्! जो श्रुति और स्मृति में कहे हुए कर्मों को फल की इच्छा न करके करता है, वह योगी कर्म का त्याग करने वाले योगियों से श्रेष्ठ है।
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