तत्सर्वमर्पयेद्ब्रह्मण्यपि कर्म करोति यः ।
न लिप्यते पुण्यपापैर्भानुर्जलगतो यथा ॥
जो कर्म करने वाला सारे कर्म ब्रह्म में अर्पण कर देता है, वह उसी प्रकार पाप-पुण्य से लिप्त नहीं होता, जैसे जल में पड़ा हुआ सूर्य का बिम्ब उससे लिप्त नहीं होता।
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