तत्त्वविद्योगयुक्तात्मा करोमीति न मन्यते ।
एकादशानीन्द्रियाणि कुर्वन्ति कर्मसंख्यया ॥
तत्त्व को जानने वाला योगयुक्त आत्मवान् पुरुष "मैं कर्ता हूँ", ऐसा नहीं मानता, अपितु मनसहित एकादश इन्द्रियाँ कर्म करती हैं, ऐसा मानता है।
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