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गणेशगीता • अध्याय 4 • श्लोक 37
जन्तूनां हितकर्तारं कर्मणां फलदायिनम् । मां ज्ञात्वा मुक्तिमाप्नोति त्रैलोक्यस्येश्वरं विभुम् ॥ इति श्रीगणेशपुराणे गजाननवरेण्यसंवादे गणेशगीतायां वैधसंन्यासयोगो नाम चतुर्थोऽध्यायः ॥
सब प्राणियों के हितकारी और कर्म का फल देने वाले एवं त्रिलोकी के व्यापक मुझ ईश्वर को जानकर मनुष्य मुक्त हो जाते हैं।
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