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गणेशगीता • अध्याय 4 • श्लोक 34
प्राणायामैर्द्वादशभिरुत्तमैर्धारणा मता । योगस्तु धारणे द्वे स्याद्योगीशस्ते सदाभ्यसेत् ॥
बारह उत्तम प्राणायाम से उत्तम धारणा होती है, दो धारणा से योग सिद्ध होता है, योगी निरन्तर धारणा का अभ्यास करे।
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