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गणेशगीता • अध्याय 4 • श्लोक 33
पूरकं कुम्भकं चैव रेचकं च ततोऽभ्यसेत् । अतीतानागतज्ञानी ततः स्याज्जगतीतले ॥
पूरक-कुम्भक और रेचक का अभ्यास करके यह प्राणी इस जगत्में भूत, भविष्य तथा वर्तमान तीनों काल का ज्ञाता हो जाता है।
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