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गणेशगीता • अध्याय 4 • श्लोक 27
प्राणायामं तु संरोधं प्राणापानसमुद्भवम् । वदन्ति मुनयस्तं च त्रिधाभूतं विपश्चितः ॥
प्राण और अपान वायु के रोकने को प्राणायाम कहते हैं, बुद्धिमान् ऋषियों ने उसके तीन भेद कहे हैं।
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