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गणेशगीता • अध्याय 4 • श्लोक 26
आसनेषु समासीनस्त्यक्त्वेमान्विषयान्बहिः । संस्तभ्य भृकुटीमास्ते प्राणायामपरायणः ॥
सब बाह्य विषयों का त्यागकर एकान्त में आसन में स्थित हो, दृष्टि को भ्रूमध्य में स्थिर कर प्राणायाम करे।
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