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गणेशगीता • अध्याय 4 • श्लोक 24
अन्तर्निष्ठोऽन्तःप्रकाशोऽन्तःसुखोऽन्तारतिर्लभेत् । असंदिग्धोऽक्षयं ब्रह्म सर्वभूतहितार्थकृत् ॥
जिनके हृदय में निष्ठा है, ज्ञान का प्रकाश है, सुख है तथा वैराग्य है, जो सब प्राणियों का हित करता है, वह निश्चय ही अक्षय ब्रह्म को प्राप्त करता है।
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