जिनका मन समता में स्थित है, वे जीवन्मुक्त संसार और स्वर्ग को जीत चुके हैं, कारण कि ब्रह्म निर्दोष और समतायुक्त है, इस कारण वे ब्रह्म में स्थित रहते हैं।
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