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गणेशगीता • अध्याय 4 • श्लोक 16
मन्निष्ठा मद्धियोऽत्यन्तं मच्चित्ता मयि तत्पराः । अपुनर्भवमायान्ति विज्ञानान्नाशितैनसः ॥
जिनकी निष्ठा और बुद्धि मुझमें ही है, जिनका चित्त मुझमें अत्यन्त आसक्त है और जो सदा मेरे परायण हैं, वे श्रेष्ठ ज्ञान द्वारा पाप का नाश करके मुक्त हो जाते हैं।
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