न क्रिया न च कर्तृत्वं कस्य चित्सृज्यते मया ।
न क्रियाबीजसम्पर्कः शक्त्या तत्क्रियतेऽखिलम् ॥
ऐसा जाने कि न कोई क्रिया करता हूँ, न कोई कर्तृत्वपना मुझमें है, न मैं कोई निर्माण करता हूँ, न मेरा क्रिया के बीज से सम्बन्ध है, यह सब कुछ शक्ति अर्थात् प्रकृति से स्वयं होता रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।