अहमेव परो ब्रह्म महारुद्रोऽहमेव च ।
अहमेव जगत्सर्वं स्थावरं जङ्गमं च यत् ॥
मैं ही श्रेष्ठ ब्रह्मा हूँ, मैं ही महारुद्र हूँ, मैं ही स्थावर-जंगमरूप सम्पूर्ण जगत् हूँ।
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