गणेश उवाच-
अनेकानि च ते जन्मान्यतीतानि ममापि च ।
संस्मरे तानि सर्वाणि न स्मृतिस्तव वर्तते ॥
गणेशजी बोले - (हे राजन्!) मेरे और तुम्हारे अनेक जन्म बीत चुके हैं, मैं उन सबको जानता हूँ, परंतु तुम नहीं जानते।
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