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गणेशगीता • अध्याय 3 • श्लोक 50
ज्ञानखड्गप्रहारेण संभूतामज्ञतां बलात् । छित्वान्तःसंशयं तस्माद्योगयुक्तो भवेन्नरः ॥ इति श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु योगामृतार्थशास्त्रे श्रीगणेशपुराणे उत्तरखण्डे गजाननवरेण्यसंवादे विज्ञानप्रतिपादनो नाम तृतीयोऽध्यायः ॥
इस कारण ज्ञानरूपी खड्ग से मन के अज्ञान तथा संशय को बलपूर्वक काटकर मनुष्य को योग का आश्रय लेना उचित है।
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